*“रॉबिन का धर्म” लघु नाटक ने दर्शकों को किया सोचने पर मजबूर, धर्म, जाति और मानवीय मूल्यों पर आधारित प्रस्तुति को मिली सराहना*

ऋषिकेश/उत्तराखंड भास्कर- ऋषिकेश में “रॉबिन का धर्म” शीर्षक से एक प्रभावशाली लघु नाटक का मंचन किया गया, जिसने धर्म, जाति और सच्चे धर्म के स्वरूप से जुड़े गहरे एवं समकालीन प्रश्नों को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया। मात्र 15 मिनट की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा और किसी निष्कर्ष को थोपने के बजाय उन्हें स्वयं चिंतन और मनन करने के लिए प्रेरित किया।
नाटक का लेखन एवं निर्देशन शुभम मिश्रा द्वारा किया गया, जबकि अरुंधति मिश्रा ने “रॉबिन” और हिमांशु राय ने “मिश्रा जी” की भूमिका निभाई। मंचन के दौरान प्रकाश व्यवस्था का संचालन त्रिशा मुखर्जी ने किया, वहीं ध्वनि संयोजन की जिम्मेदारी आदित्य केशी ने संभाली। सीमित समय में भी नाटक ने दर्शकों के भीतर नई दृष्टि विकसित करने और एक गहरे आंतरिक संवाद की शुरुआत करने में सफलता प्राप्त की।

इस प्रस्तुति का आयोजन “किताबी कबूतर” संस्था द्वारा किया गया, जो ऋषिकेश में शुभम मिश्रा और अरुंधति मिश्रा द्वारा संचालित एक कला एवं साहित्यिक समूह है। कार्यक्रम को “वशिष्ठ वेलनेस” (लक्कड़घाट, ऋषिकेश) का सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में हिंद युग्म से प्रकाशित लेखिका ज्योति शर्मा सहित एम्स ऋषिकेश से जुड़े चिकित्सक एवं नर्सिंग अधिकारी, जिनमें डॉ. राजलक्ष्मी, डॉ. राकेश, डॉ. आकांक्षा और पूनम चंबा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा जूही, मयंक, आदित्य, त्रिशा, प्रगति, प्रवीन और दीपक सहित अन्य दर्शकों ने भी नाटक की सराहना की।




