Blogउत्तराखंड भास्करऋषिकेशएक्सक्लूसिव खबरेंदेहरादूनसिटी एक्सप्रेस स्पेशल
*यज्ञ की सुरक्षा पर त्रिपुरा पीठाधीश्वर यज्ञ सम्राट हरि ओम जी का बड़ा बयान, ब्राह्मण विद्यार्थी और साधुओं की सुरक्षा की मांग, सरकारों को भेजे ईमेल, घटना हुई तो संबंधित सरकार और पीएमओ होंगे जिम्मेदार, आमरण अनशन की चेतावनी*

(रिपोर्ट@ईश्वर शुक्ला)
ऋषिकेश/ उत्तराखंड भास्कर- देश के विभिन्न राज्यों में यज्ञ-हवन के आयोजनों के दौरान कथित उपद्रव और विरोध की घटनाओं को लेकर त्रिपुरा पीठाधीश्वर चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट 1008 हरि ओम जी ने सरकारों को सुरक्षा के प्रति गंभीरता बरतने की चेतावनी दी है। एक विशेष बातचीत में उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में उनके यज्ञ आयोजनों के दौरान तीन बार दंगे या उपद्रव की स्थिति बनी, जबकि त्रिपुरा में भी ऐसी घटना हुई। उन्होंने कुरुक्षेत्र और जींद की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कुछ राजनीतिक नेताओं और कथित पाखंडी बाबाओं पर षड्यंत्र करने के आरोप लगाए। हरि ओम जी ने बताया कि सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड सरकार, गृह मंत्रालय, पीएमओ, हरियाणा सरकार और मुख्य न्यायाधीश को ईमेल भेजकर अवगत कराया गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि इसके बाद भी सुरक्षा में चूक से कोई घटना होती है तो संबंधित राज्य सरकार और पीएमओ उसकी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह न भाजपा से जुड़े हैं और न कांग्रेस से।
‘हमें नहीं, ब्राह्मण विद्यार्थी और साधु-संतों की सुरक्षा चाहिए’
हरि ओम जी महाराज ने कहा कि वह अपने लिए सुरक्षा नहीं मांग रहे हैं। उनकी चिंता यज्ञ की तैयारियों में साथ चलने वाले ब्राह्मण विद्यार्थी और साधु-संतों को लेकर है। उन्होंने कहा कि उनके काफिले में 10-20 साधु रहते हैं और कई अवसरों पर 40 से 50 तथा 100 तक ब्राह्मण एवं विद्यार्थी भी साथ होते हैं। उन्होंने सोनीपत में एक साधु के घायल होने का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व की घटनाओं की जांच को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ की तैयारी के लिए जाने वाले इन बच्चों को यदि कोई नुकसान पहुंचता है तो यह उनके लिए सबसे बड़ी चिंता होगी। ‘हम टाइगर हैं, अपने लिए सुरक्षा नहीं चाहिए, लेकिन इन मासूम बच्चों की सुरक्षा जरूरी है।’ उन्होंने मांग की कि जिस राज्य में उनका काफिला पहुंचे, वहां प्रशासन उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
कुरुक्षेत्र में 108 कुंडीय यज्ञशाला बनाने की अपनी इच्छा का उल्लेख करते हुए हरि ओम जी ने कहा कि गीता की कर्मभूमि से यज्ञ और कर्म का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों को लगा कि ऐसी यज्ञशाला बनने से उनके कथित हित प्रभावित होंगे और इसी कारण विरोध तथा उपद्रव की स्थिति पैदा की गई। उन्होंने कहा कि उनका किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं है और वह यज्ञ के माध्यम से समाज को कर्म का संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल गीता का प्रवचन करने से काम नहीं चलेगा, गीता में बताए यज्ञ कर्म को जीवन में उतारना भी जरूरी है।
हरि ओम जी महाराज ने कहा कि भविष्य में उनके काफिले के साथ किसी तरह की अप्रिय घटना होती है तो वह आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाएंगे, बल्कि साधु-संतों और विद्यार्थियों के साथ आमरण अनशन करेंगे। उन्होंने संबंधित सरकारों और प्रशासन से समय रहते सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की अपील करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के विरोध या समर्थन से नहीं, बल्कि यज्ञ, धर्म, शिक्षा और समाजहित से जुड़े कार्यों को सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ाना है। उन्होंने सरकारों से कहा कि उनके द्वारा भेजे गए ईमेल को गंभीरता से लेते हुए काफिले की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।





