*गंगा तट से गूंजा यज्ञ का संदेश, त्रिवेणी घाट से शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस जन-जागृति यात्रा, यज्ञ सम्राट 1008 हरिओम महाराज और महापौर शंभू पासवान ने मां गंगा का पूजन कर किया यात्रा का शुभारंभ, सैकड़ों साधु-संतों व गणमान्य नागरिकों ने लिया हिस्सा*

(रिपोर्ट@ईश्वर शुक्ला) ऋषिकेश/उत्तराखंड भास्कर- चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस को लेकर तीर्थनगरी ऋषिकेश में आध्यात्मिक एवं जन-जागरण की अलख जग उठी है। पावन त्रिवेणी घाट पर यज्ञ सम्राट 1008 श्री हरिओम महाराज के पावन सानिध्य में अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस जन-जागृति यात्रा का शुभारंभ किया गया। यज्ञ सम्राट हरिओम महाराज एवं ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान ने मां गंगा का विधिवत पूजन-अर्चन कर यात्रा को रवाना किया। इस दौरान सैकड़ों साधु-संतों, श्रद्धालुओं, धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों तथा शहर के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी रही। वैदिक मंत्रोच्चार और मां गंगा के जयघोष के बीच यात्रा के शुभारंभ से पूरा गंगा तट भक्तिमय हो उठा।
यज्ञ सम्राट 1008 हरिओम महाराज ने कहा कि यज्ञ भारतीय सनातन संस्कृति की महान परंपरा है, जो आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ प्रकृति, पर्यावरण और लोकमंगल का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि जन-जागृति यात्रा का उद्देश्य यज्ञ की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाना और अधिक से अधिक लोगों को इस सनातन परंपरा से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि 17 सितंबर को चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस के अवसर पर प्रातः 4:30 बजे से त्रिवेणी घाट पर 1008 कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे बड़ी संख्या में त्रिवेणी घाट पहुंचकर यज्ञ में आहुति दें और इस पावन धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बनकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें।
महापौर शंभू पासवान ने कहा कि ऋषिकेश जैसी पावन नगरी से अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस की जन-जागृति यात्रा का शुभारंभ होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यज्ञ हमारी प्राचीन सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसे आयोजन समाज को आध्यात्मिक चेतना के साथ अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने भी क्षेत्रवासियों से 17 सितंबर को सुबह 4:30 बजे त्रिवेणी घाट पहुंचकर 1008 कुंडीय यज्ञ में आहुति देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार यज्ञ में सहभागी बने और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना करे। हरिओम महाराज और महापौर शंभू पासवान ने संयुक्त रूप से शहरवासियों से भारी संख्या में पहुंचकर यज्ञ का हिस्सा बनने तथा धार्मिक अनुष्ठान का लाभ लेने का आह्वान किया। गंगा तट से शुरू हुई यह जन-जागृति यात्रा 17 सितंबर के यज्ञ दिवस के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी और लोगों को घर-घर यज्ञ की सनातन परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी।




