*पुरानी पेंशन बहाली के लिए देहरादून में उमड़ा कर्मचारियों का हुजूम, मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान धक्का-मुक्की, पहले बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़े कर्मचारी, दूसरे बैरिकेड पर पुलिस ने रोका; मुख्यमंत्री कार्यालय से लिखित आश्वासन मिलने के बाद स्थगित हुआ आंदोलन*

(रिपोर्ट@संवाददाता) देहरादून/उत्तराखंड भास्कर। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सोमवार को देहरादून की सड़कों पर हजारों कर्मचारी और शिक्षक उतर आए। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के आह्वान पर परेड मैदान से मुख्यमंत्री आवास तक प्रदेश स्तरीय विशाल रैली निकाली गई। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और एकीकृत पेंशन योजना के विरोध में आयोजित इस रैली को प्रदेश के करीब 65 संगठनों का लिखित समर्थन प्राप्त था। उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों के साथ उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से भी विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी इसमें शामिल हुए। कर्मचारियों और मातृशक्ति की भारी भागीदारी ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को व्यापक समर्थन मिलने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पहले बैरिकेड को पार कर लिया, लेकिन दूसरे बैरिकेड पर पुलिस के भारी सुरक्षा बल ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। संगठन के अनुसार, इस दौरान प्रदेश महामंत्री सीताराम पोखरियाल, जिला महामंत्री अभिषेक नवानी और मंडल अध्यक्ष शंकर भट्ट को चोटें आईं तथा धक्का-मुक्की में उनके कपड़े भी फट गए। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब तीनों पदाधिकारी सड़क पर लेट गए और चक्काजाम की स्थिति बन गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार की ओर से लिखित में ठोस और सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला तो मौके पर ही भूख हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से संगठन के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास स्थित कार्यालय में वार्ता के लिए बुलाया गया। काफी देर तक चली बातचीत के बाद मुख्यमंत्री समन्वयक ने लिखित पत्र सौंपकर आश्वासन दिया कि राज्य स्थापना दिवस के कुछ दिन बाद राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के प्रतिनिधियों को पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया जाएगा। संगठन ने इसे अपनी मांग के संबंध में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। इसके बाद सड़क से प्रदर्शन समाप्त किया गया और यातायात सुचारु कराया गया।
जिला देहरादून अध्यक्ष अवधेश सेमवाल ने कहा कि संगठन को लिखित आश्वासन मिला है, लेकिन यदि तय आश्वासन के अनुरूप वार्ता और सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। महिला संयुक्त मंत्री रीतू कोठारी और महिला उपाध्यक्ष प्रीति पंत ने रैली में शामिल सभी मातृशक्तियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि महिला अध्यक्ष रानीता विश्वकर्मा के नेतृत्व में आगे की रणनीति तैयार कर संगठन को और मजबूत किया जाएगा।
कोषाध्यक्ष हिमांशु रावत और संगठन मंत्री शुभम चौधरी ने रैली को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है, कोई भीख नहीं। इसे बहाल कराने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। वरिष्ठ सलाहकार हरीश चंद्र पांडेय और उपाध्यक्ष अनुज कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर कर्मचारी और शिक्षक लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। समन्वयक आलोक जोशी, जिला सदस्य देवेंद्र सिंह और प्रेम सिंह रावत ने चेतावनी दी कि यदि वर्ष 2027 से पहले पुरानी पेंशन बहाल नहीं की गई तो कर्मचारी और शिक्षक सत्ता परिवर्तन के विकल्प पर भी विचार करने को मजबूर होंगे।
जिला महामंत्री अभिषेक नवानी ने प्रदेश के सभी 13 जनपदों से पहुंचे कर्मचारियों और पदाधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक प्रयास से रैली सफल रही। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल की ओर से भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा शामिल किया गया है। ऐसे में कर्मचारी अपने परिवारों के साथ इस मुद्दे पर एकजुट होकर निर्णय लेंगे। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही देहरादून में जिला स्तरीय बैठक आयोजित कर आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।
रैली में राष्ट्रीय अध्यक्ष बीपी सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी, कार्यकारी अध्यक्ष पूर्ण फर्स्वाण, महामंत्री सीताराम पोखरियाल, प्रभारी विक्रम सिंह रावत, उपाध्यक्ष केदार फर्स्वाण, समन्वयक लक्ष्मण सजवाण, सचिव मक्खन लाल क्लिंटन, सह प्रभारी जसपाल गुसाईं, महिला अध्यक्ष रानीता विश्वकर्मा, मंडल अध्यक्ष शंकर भट्ट, मंत्री राजीव उनियाल और रुद्रप्रयाग अध्यक्ष अंकित रौथान सहित प्रदेशभर से आए अनेक पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।




