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*खच्चरों के स्वामित्व और भुगतान को लेकर विवाद, पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार, आपदा के दौरान लापता हुए थे खच्चर, एयरटैग और बीमा दस्तावेजों को आधार बनाकर रोशन लाल ने उठाए सवाल; पुलिस और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग*

 

(रिपोर्ट@हरीश चन्द्र)                                      ऊखीमठ/उत्तराखंड भास्कर।  जनपद रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ क्षेत्र में आपदा के दौरान लापता हुए खच्चरों के स्वामित्व और उनके भुगतान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्राम देवली भणिग्राम के श्रीवाणी निवासी रोशन लाल ने मामले में न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि लंबे समय से मामला लंबित है, लेकिन अब तक उन्हें उनका भुगतान नहीं मिल पाया है।

रोशन लाल के अनुसार, वह छोटी लिंचोली में दुकान संचालन के साथ घोड़े-खच्चरों का कारोबार करते थे। बीते 31 जुलाई को रात करीब 8:30 बजे आई भीषण आपदा के दौरान उनके खच्चर लापता हो गए थे। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर से खच्चरों की खोजबीन शुरू की। पूछताछ के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि उनके खच्चर जंगलचट्टी के आसपास देखे गए थे। रोशन लाल का आरोप है कि बाद में शर्मा लाल उन खच्चरों को अपने साथ नाग धारकोट स्थित घर ले गए। पीड़ित का कहना है कि खच्चरों की पहचान के लिए उनके कानों पर लगे एयरटैग नंबर और बीमा संबंधी दस्तावेज उनके नाम पर दर्ज हैं, जो स्वामित्व की पुष्टि के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब जोड़ी के एक खच्चर की मृत्यु हो गई और उसके बीमा क्लेम को लेकर विवाद सामने आया। रोशन लाल का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने सोनप्रयाग थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक, तत्कालीन थाना अध्यक्ष अनिल बलूनी ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर आपसी समझौते का प्रयास किया था। इस दौरान शर्मा लाल की ओर से एक सप्ताह के भीतर भुगतान करने की बात कही गई थी, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी उन्हें भुगतान नहीं किया गया।

रोशन लाल का आरोप है कि जब उन्होंने दोबारा फोन कर अपने भुगतान की मांग की तो उन्हें कथित तौर पर जवाब मिला कि पैसे नहीं दूंगा, जो करना है कर लो। इसके बाद से वह न्याय के लिए भटक रहे हैं। उनका सवाल है कि जब खच्चरों की पहचान से जुड़े एयरटैग नंबर और बीमा संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो अब तक मामले का निस्तारण क्यों नहीं हो पाया है?

अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें

इस पूरे प्रकरण में कई अहम सवाल सामने आ रहे हैं। खच्चरों का वास्तविक स्वामित्व किसका है? एयरटैग नंबर और बीमा दस्तावेजों के आधार पर क्या तथ्यों की पुष्टि की गई है? एक खच्चर की मृत्यु के बाद बीमा क्लेम से संबंधित स्थिति क्या है और कथित तौर पर तय किए गए भुगतान का अब तक निस्तारण क्यों नहीं हुआ? पीड़ित ने यह भी आशंका जताई है कि कहीं किसी प्रभाव या दबाव के चलते मामले में कार्रवाई प्रभावित तो नहीं हो रही है।

फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दूसरे पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है। ऐसे में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से अपेक्षा है कि उपलब्ध दस्तावेजों, एयरटैग नंबर, बीमा रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही मामले में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

 

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