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*ज्ञात-अज्ञात आत्माओं की सद्गति को भागवत कथा में तर्पण, पितृपक्ष में त्रिवेणी घाट पर गूंजा श्रीमद्भागवत का मंगल संदेश, पूर्व मेयर अनीता ममगाईं ने आयोजकों को दी बधाई, गढ़वाल बॉयज टीम का सम्मान*

 

(ईश्वर शुक्ला)                                                ऋषिकेश/उत्तराखंड भास्कर।  पितृपक्ष के पावन अवसर पर त्रिवेणी घाट के गंगा तट पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन ज्ञात-अज्ञात आत्माओं की सद्गति और पितरों की शांति के लिए विधिवत पूजन एवं तर्पण किया गया। कथा व्यास आचार्य सुशील रतूड़ी ने कहा कि सामान्यतः प्रत्येक व्यक्ति अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करता है, लेकिन ज्ञात-अज्ञात आत्माओं के लिए सामूहिक रूप से ऐसा आयोजन करना अपने आप में पुण्यदायी कार्य है। उन्होंने कहा कि पितरों का स्मरण केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़ने का माध्यम भी है।

कथा के दौरान त्रिवेणी घाट का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा। पूर्व मेयर अनीता ममगाईं ने आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए इसे पुण्य और जनकल्याण से जुड़ा प्रयास बताया। इस अवसर पर गोवा में स्वर्ण पदक जीतकर लौटी गढ़वाल बॉयज टीम को भी सम्मानित किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा का श्रवण किया और पितरों के निमित्त प्रार्थना की।

कार्यक्रम में अधिवक्ता रमा वल्लभ भट्ट, देवेंद्र दत्त जोशी, शंकर नौटियाल, भगवान सिंह रावत, हेमवंती पैन्यूली, विकास सेमवाल, विपिन बिजल्वाण, भगवती रतूड़ी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। मंडपाचार्य आचार्य रोशन पैन्यूली ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। त्रिवेणी घाट पर 4 से 10 अक्टूबर तक आयोजित हो रही इस कथा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ रही है।

आयोजक मनीष डिमरी के संयोजन और सह आयोजक भागवत प्रसाद रतूड़ी के सहयोग से चल रहे आयोजन में श्री देवभूमि ब्राह्मण महासभा ट्रस्ट उत्तराखंड सहित कथा प्रेमी श्रद्धालुओं का सहयोग मिल रहा है। पितृपक्ष में गंगा तट पर हो रही यह श्रीमद्भागवत कथा भक्ति के साथ उन ज्ञात-अज्ञात आत्माओं के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का माध्यम बन रही है, जिन्हें स्मरण करने वाला शायद कोई नहीं है।

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